बुधवार, 4 नवंबर 2015

शक्ति पीठ एक परिचय

गांधी सागर बांध निर्माण मे सबसे ज्यादा क्षति शंखोद्धार तीर्थ की हुई है  जिसकी क्षतिपूर्ति  आने वाले कई युगो तक होना संभव नहीं है
 जिसके कारण हमे अपने गौरव पूर्ण इतिहास से वंचित होना पड़ा है  

शक्ति पीठ एक परिचय

[10/30, 09:29] vishnuprasad gyani: अजमेर के रामा भील का रामपुरा मे चन्द्रावतो से युद्ध हुआ युद्ध में  लडते लडते रामा भील का सर कट जाने के बाद भी उसका धड दौडते दौडते पराम्बा श्री धरा देवी के पावन तीर्थ क्षेत्र शंखोद्धार की भूमि तक आ पहुचा परं शिवभक्त होने  और देवी के क्षेत्र में अपने प्राणोत्सर्ग से प्रसन्न होकर माँ ने उसे भैरवत्व प्रदान कर दिया  तब से आज भी  जरिया भैरव के नाम से उनकी पूजा पूरा मालवा कर रहा है उनके दर्शन मात्र से प्रेत को मोक् प्राप्त हो जाता है 
[10/30, 09:29] vishnuprasad gyani: इतिहासकारो ने शंखोद्धार तीर्थ क्षेत्र  को ही महाकवि कालिदास की जन्मस्थली  प्रमाणित किया है 
[10/30, 09:29] vishnuprasad gyani: मालवा का प्रसिद्ध पशु मेला यही आयोजित होता था  जो वर्तमान में  समीप  शामगढ नगर मे लगता है 
[10/30, 09:29] vishnuprasad gyani: शंखोद्धार तीर्थ का वर्णन श्रीधर स्वामी ने अपने मराठी ग्रंथ  पाण्डव प्रताप मे भी किया है 
[10/30, 09:29] vishnuprasad gyani: चार्वाक मत के अनुयायी  चर्मक ॠषि की  समाधि भी शंखोद्धार तीर्थ मे ही है 
[10/30, 09:29] vishnuprasad gyani: शंखोद्धार तीर्थ मे ही  राजा यशवंत राव होल्कर ने पुत्र प्राप्ति की कामना की थी 

शक्ति पीठ एक परिचय

प्रसिद्ध नास्तिक दर्शन चार्वाक के जनक चार्वाक की जन्मस्थली हैं  शंखोद्धार तीर्थ
 युधिष्ठिर राज्यातीत शकाब्द 661 मे  वैशाख शु 15 रविवार को मध्यान्ह के समय उनका जन्म हुआ था
उनके पिता का नाम इंदुकांत  व मता का नाम  सृग्विणी था  इन्हें अनीश्वर वादी दर्शन का जनक माना जाता है



शक्ति पीठ एक परिचय

शंखोद्धार तीर्थ मे भगवती जगदंबा  धरा नाम से  विद्यमान है
सत् युग में जब सती  अपने पिता  के  यज्ञ मंडप में  शिव का अपमान सहन नहीं कर सकी तो उसने अपने ही शरीर से योगाग्नि उत्पन्न कर  अपने शरीर को जला डाला  शिव सती के शरीर को लेकर  त्रिभुवन में  घूम रहे थे  ! तब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को खंडित कर शक्ति पीठों का निर्माण किया  जहाँ जहाँ  सती के अंग प्रत्यंग गिरे वहां वहां एक नया शक्ति पीठ बनता गया उसी श्रृंखला में शंखोद्धार तीर्थ मे यह स्थान शक्ति पीठ बना
यही परद्वापर युग म भगवान श्री कृष्ण ने  शंखासुर राक्षस को मार कर महर्षि सांदीपनि के पुत्र को  लौटाया था
महभारत युद्ध के पश्चात श्री कृष्ण के कहने पर पांडवो ने यही पर राजसूय यज्ञ कर यज्ञान्त स्नान किया था
श्रापित यदुवंशियों के अस्थि कलश को यही  विसर्जित कर बद्रिकाश्रम की अोर चले गए
 कलियुग मे अजमेर का रामा भील यहाँ  शिकार खेल ने आया   तब रामा और स्थानीय राजाओ मे युद्ध हुआ  युद्ध करते करते  रामा भील का सिर रामपुरा मेही गिरा और धडं शंखोद्धार तीर्थ मे आ कर गिरा इस घटना से देवी प्रसन्न हो गई  और उसे प्रेतो का  मुखिया  घोषित कर दिया  और तब से आज तक यह स्थान मालवा का हरिद्वार  बना हुआ है
 प्रति वर्ष कार्तिक सुदी 11 से पूर्णिमा तक बहुत दूर दूर से श्रद्धालु यहाँ आकर अपने  कष्टो से मुक्ति  पाते है इस लुप्तप्रायः पीठ के पुनर्जागरण का संकल्प  दक्षिणेश्वरी ज्योतिष योग साधना संस्था ने लिया  ओर उसी के सत् प्यास से ये तत्थ्य हमारे समक्ष  प्रस्तुत हुए हैं   अधिक से अधिक  शेयर कर पीठ के प्रचार प्रसार में सहयोग प्रदान करे !
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                           साभार
               श्री घनश्याम शर्मा
                     आचार्य
        श्री घरा धाम शक्ति पीठ
चचावदा पठरी त. गरोठ जि. मंदसौर
चलवाक् 9755490285.
             9617436263
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