शंखोद्धार तीर्थ मे भगवती जगदंबा धरा नाम से विद्यमान है
सत् युग में जब सती अपने पिता के यज्ञ मंडप में शिव का अपमान सहन नहीं कर सकी तो उसने अपने ही शरीर से योगाग्नि उत्पन्न कर अपने शरीर को जला डाला शिव सती के शरीर को लेकर त्रिभुवन में घूम रहे थे ! तब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को खंडित कर शक्ति पीठों का निर्माण किया जहाँ जहाँ सती के अंग प्रत्यंग गिरे वहां वहां एक नया शक्ति पीठ बनता गया उसी श्रृंखला में शंखोद्धार तीर्थ मे यह स्थान शक्ति पीठ बना
यही परद्वापर युग म भगवान श्री कृष्ण ने शंखासुर राक्षस को मार कर महर्षि सांदीपनि के पुत्र को लौटाया था
महभारत युद्ध के पश्चात श्री कृष्ण के कहने पर पांडवो ने यही पर राजसूय यज्ञ कर यज्ञान्त स्नान किया था
श्रापित यदुवंशियों के अस्थि कलश को यही विसर्जित कर बद्रिकाश्रम की अोर चले गए
कलियुग मे अजमेर का रामा भील यहाँ शिकार खेल ने आया तब रामा और स्थानीय राजाओ मे युद्ध हुआ युद्ध करते करते रामा भील का सिर रामपुरा मेही गिरा और धडं शंखोद्धार तीर्थ मे आ कर गिरा इस घटना से देवी प्रसन्न हो गई और उसे प्रेतो का मुखिया घोषित कर दिया और तब से आज तक यह स्थान मालवा का हरिद्वार बना हुआ है
प्रति वर्ष कार्तिक सुदी 11 से पूर्णिमा तक बहुत दूर दूर से श्रद्धालु यहाँ आकर अपने कष्टो से मुक्ति पाते है इस लुप्तप्रायः पीठ के पुनर्जागरण का संकल्प दक्षिणेश्वरी ज्योतिष योग साधना संस्था ने लिया ओर उसी के सत् प्यास से ये तत्थ्य हमारे समक्ष प्रस्तुत हुए हैं अधिक से अधिक शेयर कर पीठ के प्रचार प्रसार में सहयोग प्रदान करे !
किसी प्रकार के सहयोग हेतू संपर्क करे
साभार
श्री घनश्याम शर्मा
आचार्य
श्री घरा धाम शक्ति पीठ
चचावदा पठरी त. गरोठ जि. मंदसौर
चलवाक् 9755490285.
9617436263
8889138932
सत् युग में जब सती अपने पिता के यज्ञ मंडप में शिव का अपमान सहन नहीं कर सकी तो उसने अपने ही शरीर से योगाग्नि उत्पन्न कर अपने शरीर को जला डाला शिव सती के शरीर को लेकर त्रिभुवन में घूम रहे थे ! तब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को खंडित कर शक्ति पीठों का निर्माण किया जहाँ जहाँ सती के अंग प्रत्यंग गिरे वहां वहां एक नया शक्ति पीठ बनता गया उसी श्रृंखला में शंखोद्धार तीर्थ मे यह स्थान शक्ति पीठ बना
यही परद्वापर युग म भगवान श्री कृष्ण ने शंखासुर राक्षस को मार कर महर्षि सांदीपनि के पुत्र को लौटाया था
महभारत युद्ध के पश्चात श्री कृष्ण के कहने पर पांडवो ने यही पर राजसूय यज्ञ कर यज्ञान्त स्नान किया था
श्रापित यदुवंशियों के अस्थि कलश को यही विसर्जित कर बद्रिकाश्रम की अोर चले गए
कलियुग मे अजमेर का रामा भील यहाँ शिकार खेल ने आया तब रामा और स्थानीय राजाओ मे युद्ध हुआ युद्ध करते करते रामा भील का सिर रामपुरा मेही गिरा और धडं शंखोद्धार तीर्थ मे आ कर गिरा इस घटना से देवी प्रसन्न हो गई और उसे प्रेतो का मुखिया घोषित कर दिया और तब से आज तक यह स्थान मालवा का हरिद्वार बना हुआ है
प्रति वर्ष कार्तिक सुदी 11 से पूर्णिमा तक बहुत दूर दूर से श्रद्धालु यहाँ आकर अपने कष्टो से मुक्ति पाते है इस लुप्तप्रायः पीठ के पुनर्जागरण का संकल्प दक्षिणेश्वरी ज्योतिष योग साधना संस्था ने लिया ओर उसी के सत् प्यास से ये तत्थ्य हमारे समक्ष प्रस्तुत हुए हैं अधिक से अधिक शेयर कर पीठ के प्रचार प्रसार में सहयोग प्रदान करे !
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श्री घनश्याम शर्मा
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श्री घरा धाम शक्ति पीठ
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